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जादुई फल मांगता हूँ ……………….(ग़ज़ल )

डी. के. निवातिया

डी. के. निवातिया

गज़ल/गीतिका

July 1, 2016

जादुई फल मांगता हूँ ……………….(ग़ज़ल )

ऊब गया हूँ बेजुबानो की भीड़ में रहकर तन्हा
अब अकेले में जश्न के लिए दो पल मांगता हूँ !!

पत्थर सा बन गया हूँ देखकर बेदर्द जमाने को
नयनो के समुन्द्र से अंजुली भर जल माँगता हूँ !!

बर्बाद हो गया हूँ बहकर बदलाव की इस लहर में
रास नहीं आता आज, बीता हुआ कल मांगता हूँ !!

नफ़रतो के साये में खौफजदा है हर एक रूह
बदल जाए नजरिया आतंक का हल मांगता हूँ !!

हर तरफ खिले हो गुलशन में गुल मोहब्बत के
नीरस जिंदगी में अब वो हसीन पल मांगता हूँ !!

कोई दौलत ना जागीर चाहिये “धर्म” को यारो
मिटादे जहन से नफरत, वो जादुई फल मांगता हूँ !!
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डी. के. निवातियाँ ____________@@@

Author
डी. के. निवातिया
नाम: डी. के. निवातिया पिता का नाम : श्री जयप्रकाश जन्म स्थान : मेरठ , उत्तर प्रदेश (भारत) शिक्षा: एम. ए., बी.एड. रूचि :- लेखन एव पाठन कार्य समस्त कवियों, लेखको एवं पाठको के द्वारा प्राप्त टिप्पणी एव सुझावों का... Read more
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