Apr 29, 2017 · कविता
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जाग्रत हिंदुस्तान चाहिए

जाग्रत हिंदुस्तान चाहिए ,जाग्रत हिंदुस्तान चाहिए
मानव मन के मन को धोने वाला पावन ज्ञान चाहिए

गोदी में भूखा रोता है भारत माँ का अंश विकल है
दीन-विवश -बलहीन बंधुओं पर भारी शोषण औ छल है
गली-राजपथ -चौराहों पर लक्ष्यहीन नर भ्रमित चित्त-सा
कैसे बोलें राष्ट्र सबल, जब चेतहीन मदकंस प्रबल है
मार भगा दे जो दुर्गुणमय तिमिर दीप-सा ध्यान चाहिए
जाग्रत हिंदुस्तान चाहिए,जाग्रत हिंदुस्तान चाहिए

सूर्पणखामय बृहद् विश्व से लक्ष्मण का स्वरूप ओझल है
काले कागरुपमय हिरदय की वाणी में भी कोयल है
इस युग की इन परिभाषाओं को बदलेगा कौन सोच लो?
स्वयं जागकर बढो, बिज्ञता बिन सारा जीवन निष्फल है
सुरभित जीवन हेतु चेत बाणों का अब संधान चाहिए
जाग्रत हिंदुस्तान चाहिए, जाग्रत हिंदुस्तान चाहिए

जीवन लेकर आए हो तो मुक्ति हेतु, ऋषिज्ञान धारिए
बंधन- अवनति -चक्रव्यूह के तोड़ हेतु गुरुद्वार झाड़िए
भारत वर्ष प्रेम- संस्कृति का चेतनमय आनंदरूप धन
इसीलिए प्रेमी किरीट बन,राष्ट्र शीष को अब निहारिए
जागो प्यारे, अब स्वदेश को, द्वंद नहीं,मुस्कान चाहिए
जाग्रत हिंदुस्तान चाहिए, जाग्रत हिंदुस्तान चाहिए
…………………………………………………………….

बृजेश कुमार नायक
“जागा हिंदुस्तान चाहिए” एवं “क्रौंच सुऋषि आलोक” कृतियों के प्रणेता
29-04-2017

-उक्त रचना को फेस बुक पेज में भी पढा जा सकता है

-2013 में मेरी प्रकाशित कृति जागा हिंदुस्तान चाहिए की रचना

-माननीय मुख्यमंत्री उ प्र ,श्री योगी आदित्यनाथ जी को भी उक्त रचना पंजीकृत पत्र द्वारा 31-03-2017 को प्रेषित की गई है |पत्र फेसबुक पेज में पढा जा सकता है |

बृजेश कुमार नायक
सुभाष नगर ,कोंच
जिला-जालौन
उत्तर प्रदेश
पिन-285205

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Pt. Brajesh Kumar Nayak
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