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जागो मतदाता जागो

हेमा तिवारी भट्ट

हेमा तिवारी भट्ट

कविता

January 26, 2017

?जागो मतदाता जागो?

देश का कल रहा पुकार
है मतदान तेरा अधिकार
श्रमिक,बणिक सुनो नर औ’नार
वक्त की है यह दरकार
जो मत देते नहीं हैं जन
देश के वे बड़े दुश्मन
जब मत देना नहीं स्वीकार
क्यों करते फिर हाहाकार
वय अठरा जिसकी पूरी हो
मतदाता वह जरूरी हो
मत की शक्ति को पहचानो
हे सत्ता के जनाधार!
सबकी नहीं दिल की सुनो
है योग्य जो उसको चुनो
देती जिसे जनता दिशा
चलती उसकी है सरकार
✍हेमा तिवारी भट्ट✍

Author
हेमा तिवारी भट्ट
लिखना,पढ़ना और पढ़ाना अच्छा लगता है, खुद से खुद का ही बतियाना अच्छा लगता है, राग,द्वेष न घृृणा,कपट हो मानव के मन में , दिल में ऐसे ख्वाब सजाना अच्छा लगता है
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