Jul 19, 2016 · कविता
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ज़िन्दगी

तरह-तरह के रंग बदलती है ज़िन्दगी
कभी तितली तो कभी गिरगिट लगती है ज़िन्दगी!

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jyotima shukla
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मैं काव्य का सृजन उतने ही मन से करती हूँ जितना एक ऋषि अपनी साधना!!... View full profile
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