ज़िन्दगी

तरह-तरह के रंग बदलती है ज़िन्दगी
कभी तितली तो कभी गिरगिट लगती है ज़िन्दगी!

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मैं काव्य का सृजन उतने ही मन से करती हूँ जितना एक ऋषि अपनी साधना!!...
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