गज़ल/गीतिका · Reading time: 1 minute

ज़िन्दगी

कहां जी है ज़िन्दगी अभी एक जमाना बाकी है.
हम भी कुन्दन हो जायेंगे, बस थोड़ा जलाना बाकी है.

माना कुछ चांदी आ गयी बालों में, इसका क्या सोचना.
गांव की उन गलियों में घूमता, बचपन सुहाना बाकी है.

बचपन बीता आई जवानी, इश्क मोहब्बत प्यार हुआ.
हमने देखा उसने देखा बस दिल का अफसाना बाकी है.

सुना ज़िन्दगी के हर गम को मिटाती है शराब.
पूरी बोतल पी गया बस एक पैमाना बाकी है.

आज के इस दौर में दीप, चारो और है अंधकार.
जिन्दा आदमी मर चुका है, बस दफनाना बाकी है.

✍️✍️…दीप

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