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ज़िन्दगी यून्ही गुज़ार ली हमने।

Wasiph Ansary

Wasiph Ansary

गज़ल/गीतिका

September 26, 2017

तेरे वादों पे वार ली हमने। ज़िन्दगी यून्ही गुज़ार ली हमने।।

अब तबस्सुम कहाँ से आएगी?
ज़ख्म सीने उतार ली हमने।।

इक रोज़ ग़लती से जो टकराया था।
मुआफी माँग क़समें हज़ार ली हमने।।

यक़ीनन झूठा था वादा भी तिरा। अफशोस!तेरी क़समें गँवार ली हमने।।

अब जाके कहीं हमने आईना देखा।
शुक्र है की सूरत सँवार ली हमने।।

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Author
Wasiph Ansary
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