*ज़िन्दगी की कशमकश*

बड़ी मुश्किल है ये ज़िंदगी..
दिल चाहे है फिर से बच्चा बन जाना

अपनों के लिए जीना..सदा मुस्कुराना..गमों को छिपाना..
यही ज़िंदगी है..क्यों छटपटाना

बड़ी मुश्किल है ये ज़िंदगी
दिल चाहे है फिर से बच्चा बन जाना

मन बांवरा ये..बड़ा कठिन है समझाना
खुद से लड़ना..खुद ही जीत जाना
यही ज़िन्दगी है क्यों घबराना

बड़ी मुश्किल है ये ज़िन्दगी
दिल चाहे है फिर से बच्चा बन जाना

कुछ माफ़ करना कुछ भूल जाना
अपनों की खुशी के लिये..अक्सर हार जाना
बस यही ज़िन्दगी है..जीते चले जाना

बड़ी मुश्किल है ये ज़िन्दगी
दिल चाहे है फिर से बच्चा बन जाना

खुश रहना और खुश रख पाना
अपनों के चेहरे पर बस मुस्कुराहटें ले आना
यही धर्म बस निभाते चले जाना
बड़ी कठिन है डगर फिर भी चलते ही जाना

बड़ी मुश्किल है ये ज़िन्दगी
दिल चाहे है फिर से बच्चा बन जाना

ना कोई टेंशन..ना कोई बहाना
बचपन होता है ये बड़ा ही सुहाना
जो मन में हो वही कह जाना
कहकर फिर कभी न पछताना

बड़ी मुश्किल है ये ज़िन्दगी
दिल चाहे है फिर से बच्चा बन जाना

निश्चल प्रेम और निस्वार्थ भावना
बचपन की यादें..वो हंसना- मुस्कुराना
बचपन होता है ये बड़ा ही सुहाना
काश मुमकिन होता फिर से बच्चा बन जाना

बड़ी मुश्किल है ये ज़िन्दगी
दिल चाहे है फिर से बच्चा बन जाना

बेहतर है अब ये हुनर सीख जाना
अपनी मौजों में रहना..बेवज़ह खिलखिलाना
लुटाते रहो यूं ही ये खुशियों का खज़ाना
निर्दोष जीवन बस जीते चले जाना

बड़ी मुश्किल है ये ज़िन्दगी
दिल चाहे है फिर से बच्चा बन जाना

©® अनुजा कौशिक

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मैं एक प्रोफ़ेश्नल सोशल वर्कर हूं..ज़िन्दगी में होने वाले अनुभवों और अपने विचारों की अभिव्यक्ति...
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