.
Skip to content

ज़िन्दगी की उलझनें

अनीला बत्रा

अनीला बत्रा

कविता

January 25, 2017

ज़िन्दगी की उलझने कभी कभी इतना सताती हैं
मुझे अपने बचपन के हसीन लम्हें याद दिलाती हैं।
माँ का आँचल ,पिता का वो प्यार भरा स्पर्श
हर दुःख में मुझे उनकी प्यारी बातें याद आती हैं
आज हर इंसान स्वार्थी ,हर शख्स खुदगर्ज़ है
ईश्वर तुम्हारी दुनिया कितनी मैली नज़र आती है।
मन के भोले लोगों को काँटों से गुज़रना पड़ता है
बुराई यहाँ आज भी फूलों से पूजी जाती है
ज़िन्दगी की उलझने कभी कभी कितना सताती हैं।

Author
अनीला बत्रा
'ऐ ज़िन्दगी कुछ ख़ास नहीं हैं चाहतें मेरी, थोड़ी सी मुस्कान लबों पर और थोड़ी सी पहचान दिलों में..' पंजाब के शिक्षा विभाग में सीनीयर सैकेंडरी स्कूल में हिन्दी विषय की अध्यापिका हूँ।पंजाब विश्वविद्यालय से भूगोल विषय में आॅनर्स और... Read more
Recommended Posts
याद आई है मुझे
वस्लो-फुर्कत की हर रात याद आई है मुझे याद किया है तो हर बात याद आई है मुझे ज़रा ज़रा सी बात पे रात दिन... Read more
माँ
माँ है कभी भूली जाती नही माँ की याद हमेशा सताती रही। बिन माँ के लोरी गाए नींद भी आती नही। माँ सपनों में आ... Read more
माँ
माँ है कभी भूली जाती नही माँ की याद हमेशा सताती रही। बिन माँ के लोरी गाए नींद भी आती नही। माँ सपनों में आ... Read more
गजल
वो मुझ पर सितम ढाती रही रात भर मुझको जगाती रही काश दूर होती ये मुफ़लिसी वो रात भर याद आती रही मुझे अपनी छत... Read more