कविता · Reading time: 1 minute

ज़िंदा

तुम्हारे जिस्म की खुशबु
तुम्हारे लम्स का जादु
मेरे अहसास की चादर”
तुम्हारी याद का तकिया
मैं जब भी लेके सोता हूँ
भले खामोश होता हूँ ‘
मुझे अहसास होता है
अभी तक मैं भी ज़िंदा हूँ !

तुम्हारा ख्वाब में आना
मेरा मदहोश हो जाना
ज़बीं को चूमना झुक कर
नज़र से ओर हो जाना”
ये सब अहसास है धुंधला
मगर जब लेके सोता हूँ ‘
मुझे अहसास होता है
अभी तक मैं भी ज़िंदा हूँ !

ग़ज़ल का नाम लिखने पर
तुम्हारा नाम लिख देना
नई ताबीर की लत में
पुराना ख्वाब लिख देना
मैं जब ये करके सोता हूँ
भले खामोश होता हूँ ‘
मुझे अहसास होता है
अभी तक मैं भी ज़िंदा हूँ !

– नासिर राव

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