May 1, 2017 · कविता
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ज़िंदाबाद

एक मई पर….

ज़िंदाबाद

ज़िंदाबाद ज़िंदाबाद
मजदूर दिवस ज़िंदाबाद…

ज़ोर ज़ोर से नारे लगती भीड़,
अधिकारो की मांग,
नारों की बुलन्दी,
मजदूर दिवस है आज,
लड़ने का हौसला
आज बहुत है…

कम्पनी के गेट पर
माइक लगा भाषण देते
मजदूर यूनियन के नेता,
भाषण के बीच में
नारे बुलन्द करती भीड़…

जोरदार आवाज के साथ
मन में उठता
एक ख्याल, एक सवाल
आज शाम की रोटी
कहाँ से आएगी
बच्चे आज क्या खाएंगे।

ज़िंदाबाद
मजदूर दिवस ज़िंदाबाद।

मंजूषा मन

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मंजूषा मन
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मैं मंजूषा मन, लेखन ही मेरा जीवन है, मन ने जो महसूसा वह लिख दिया।... View full profile
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