"ज़िंदगी"

“ज़िंदगी”

जाती हुई शाम है,
हर पल तेरे नाम है,
जी लो हसीन पलों को,
यही रब का पैगाम है।

***

जिंदगी पैग़ाम पर पैग़ाम दिए जाती है।
पर, मुझ ना समझ को,समझ नही आती है।
मेरी बेख्याली का तो आलम ये है,
ये जिंदगी अपने से दूर हुए जाती है।

वैशाली
जकार्ता

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मुझे हिंदी में काफी रूचि है. विदेश में रहते हुए हिन्दी तथा अध्यात्म की तरफ...
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