ज़िंदगी है माँ

‎ माँ

है पिता चाँद ..चाँदनी है माँ
गर है विश्वास बस वही है माँ।

नास्तिक मैं कहीं न हो जाऊँ
इक मेरी आस . वंदगी है माँ।

उसके अहसान से मिली दुनिया
आज भी ….मेरी जिंदगी है माँ |

जब कभी भी हुई परेशानी
साथ मेरे खड़ी दिखी है माँ ।

मत दिखाओ बुरी नज़र मुझको
हर बुरी आँख को चुभी है माँ ।

खुश रही जब मुझे सुखी देखा
मैं अगर हूँ दुखी… दुखी है माँ।

कर्ज जिसका कभी चुका न सकूँ
दिल में भगवान सी बसी है माँ।

– अखिलेश वर्मा
मुरादाबाद

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