Oct 28, 2019 · कविता
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ज़िंदगी से मिले आज हम

ज़िंदगी से मिले आज हम,
हंसती मुस्काती पूछने लगी ?
क्यों हो नराज़, किस बात पे है मुँह फुलाया ?
सपना कोई पूरा ना हुआ या वक़्त ने ठुकराया?
हँस कर मैंने भी अपना किस्सा सुनाया
ना, ना, ज़िंदगी तुझे पूरे चाव से बिताया,
ना वक़्त ने ठुकराया,ना ही हमने मुँह फुलाया ,
जो दिया तूने, वो खुले दिल से अपनाया,
यहां से क्या लेकर जायेंगे?
जो पाया, यहीं से पाया, यहीं गवाया,
तेरा तो बहुत अहसान है,
औरों के मुकाबले झोली भर भर कर दिया तूने
तू ही तो है मेरा कुल सरमाया,
तुझ से कैसी शिकायते?
जो भी हो, जैसी हो
इन्सान के कर्मों ने तुझे वैसा बनाया
जो बोया है वो ही पाया है,
ज़िंदगी जैसी है तू,, हमीं ने तो है तुझे बनाया

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अंजनीत निज्जर
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कवयित्री हूँ या नहीं, नहीं जानती पर लिखती हूँ जो मन में आता है !!... View full profile
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