मुक्तक · Reading time: 1 minute

ज़हर मुझे वो सौंप गई

प्रेम जलधि का इक पल में ही लहर मुझे वो सौंप गई
तन्हाई के महलों का भी शहर मुझे वो सौंप गई
जिसको जीवन समझ रहा था उसने कितना जुल्म किया
अमृत का घट कहकर पगली ज़हर मुझे वो सौंप गई।

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