मुक्तक · Reading time: 1 minute

जहाँ वजूद नही तेरा

खुशबु तेरी के लिये ही तो तरसता हूँ मै
जहाँ वजूद नही तेरा कहाँ बरसता हूँ मै
*****************************
होती हो तस्व्वुर में तन्हाई में भी हँसता हूँ
तू नही तो महफ़िल में भी कहाँ हँसता हूँ मै
*****************************
कपिल कुमार
06/08/2016

30 Views
Like
154 Posts · 6.2k Views
You may also like:
Loading...