जहाँ न पहुँचे रवि वहां पहुँचे कवि

ऊर्जा के स्रोत रवि तुम, युगधर्म पालक अहर्निश
सिखाते जीना जगाना, अज्ञान-तम को दे दविश

अन्याय अत्याचार हों जब, न्याय को करके किनारा
काल की गति भी न दे जब, बेसहारों को सहारा |

भेजता ईश्वर वहां कवि, हाज़िरी रवि की दिखाने
भक्ति भावों को जगाने, वीरता के गीत गाने |

ऊर्जा का स्रोत सूरज, कवि हृदय में वास करके
दूर करता रहा हरदम, भ्रम मन के, भाव डर के |

घूमती धरती धुरी पर, ओढ़कर आधा अँधेरा
रहे जीवन धुरी में भी, दुःख अँधेरा सुख सबेरा |

बादशाहत की निशा में, चन्दबरदाई व भूषण
रौशनी देते रहे थे, वीर उतरे थे जहां रण |

रामबोला की कलम से, राम की ज्योति जलाई
सूर केशव की प्रभा ने, भक्ति की गंगा बहाई |

मसि कलम से लिख उजाला, अँधेरा मन का भागता
पहुँचता न रवि जहां पर, यों कवि वहाँ पहुंच जाता

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