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जस भोजन, तस आप, पियो मत धारा गंदी

बृजेश कुमार नायक

बृजेश कुमार नायक

कुण्डलिया

March 21, 2017

गंदी नाली बन गया पी शराब की धार|
गिरवी रखा समूल मन, गहकर जगत्-विकार||
गह कर जगत्- विकार, बन गया भ्रम का साया|
आत्म-ह्रास-संताप, बढा हो गया सवाया||
कह “नायक” कविराय, ऩशा तज, गह आनंदी|
जस भोजन, तस आप, पिओ मत धारा गंदी||

बृजेश कुमार नायक
“जागा हिंदुस्तान चाहिए” एवं “क्रौंच सुऋषि आलोक” कृतियों के प्रणेता

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Author
बृजेश कुमार नायक
कोंच,जिला-जालौन (उ प्र) के बृजेश कुमार नायक साहित्य की लगभग सभी विधाओं के रचनाकार हैं |08मई 1961को ग्राम-कैथेरी(जालौन,उ प्र)में जन्में रचनाकार बृजेश कुमार नायक की दो कृतियाँ "जागा हिंदुस्तान चाहिए" एवं "क्रौंच सुऋषि आलोक" प्रकाशित हो चुकी है |पूर्व राज्य... Read more
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