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जश्ने आजादी

सन्दीप कुमार 'भारतीय'

सन्दीप कुमार 'भारतीय'

कविता

August 15, 2016

जश्ने आजादी

ये कैसा जश्ने आजादी है,
एक दिन की देशभक्ति है
एक दिन का दिखावा है
सन्देशों की तो बाढ है
ड्राई डे होने का अफसोस है
महानगर वासी निकल पड़े है
दो दिन छुट्टी उनके पास है
मल्टीनेशनल कंपनी वाले
एक छुट्टी मरने से उदास है,
दिनभर पतंगबाजी करके,
शाम को पार्टी का इन्तजाम है
काल्पनिक दुनिया में देशभक्त है
वास्तव में सब बकवास है,
मेरे देशवासी कहते हैं
देश में भ्रष्टाचार है
गरीबी है तंगहाली है,
सड़कों की बदहाली है,
गंदगी हर ओर फैली है,
इसका कौन जिम्मेदार है
करों की चोरी तुम करते हो,
टेबल के नीचे से जेब भरते हो
फिर बड़ी बड़ी बातें करते हो
विदेशों से कैसे तुलना करते हो,
विदेश जाकर तुम नियमों का पालन करते हो,
देश में खुलकर नियमों की अनदेखी करते हो,
खादी पहनना देशभक्ति की पहचान नही है
गांधी टोपी भी देशभक्ति की पहचान नही है
पार्टी भक्ति भी देशभक्ति की पहचान नही है
राष्ट्रीय पर्वों पर जो एहसास होता है
जो जज्बा आभासी दुनिया में दिखता है
उतरे वास्तविकता के धरातल पर
तब कुछ बात बने
जश्ने आजादी सम्पूर्ण बने ।

” सन्दीप कुमार “

Author
सन्दीप कुमार 'भारतीय'
3 साझा पुस्तकें प्रकाशित हुई हैं | दो हाइकू पुस्तक है "साझा नभ का कोना" तथा "साझा संग्रह - शत हाइकुकार - साल शताब्दी" तीसरी पुस्तक तांका सदोका आधारित है "कलरव" | समय समय पर पत्रिकाओं में रचनायें प्रकाशित होती... Read more
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