मुक्तक · Reading time: 1 minute

जल।

जीवन की कितनी बड़ी कला।जल के बिना कुछ न भला।जल की
कीमत समझले नर ज्ञानी।जल के साथ अन्याय न कर न कर देयगा पानी पानी।जल बहू मूल्य है, लेकिन तेरी नज़रों में धूल है।
तेरे को मिलता फ्री जैसा , इसलिए अनूकूल है।
जल देवता ही नही महादेवता है, तुझको समझ कब आयेगी
जब आंखों में पानी पानी हो जाएगा।

1 Like · 27 Views
Like
264 Posts · 8.8k Views
You may also like:
Loading...