मुक्तक · Reading time: 1 minute

जलाता सूर्य है हमको

जलाता सूर्य है हमको जरा घिर मेघ आओ तुम
बहुत प्यासी धरा अपनी , बरस उसको बुझाओ तुम
उदासी की घटायें हैं घिरी हरियाली के मुख पर
सुना संगीत बूंदों का उन्हें थोड़ा हँसाओ तुम
डॉ अर्चना गुप्ता

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