जलन जलन जलन तुम्हें, तुम्हें ही लूट जाएगा

कसक धरा धरा पर है, मस्तक पर धरा जाएगा
घृणा द्वेष मोह पाप, लेकर ही मरा जाएगा
अकड़ अकड़ पकड़ नहीं, नहीं में छूट जाएगा
जलन जलन जलन तुम्हें, तुम्हें ही लूट जाएगा

जननी हृदय के घात में, कितना तू मजा पाएगा
चलते हुए चलते हुए समय में, ही सजा पाएगा
सपने अपने अपने खुद से, अपने से टूट जाएगा
जलन जलन जलन तुम्हें, तुम्हें ही लूट जाएगा

धोखा धड़ी के खेल में, तू जीत कहां पाएगा
चापलूस चाटुकार दल में, तू मीत कहां पाएगा
होशियार होशियार होशियारी में, ही तू कूट जाएगा
जलन जलन जलन तुम्हें, तुम्हें ही लूट जाएगा
नवनीत पाण्डेय सेवटा (चंकी)

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