जरूरत नहीं होती। ।।

1 सुरज को कभी रोशनी की जरूरत नहीं होती ।
रात्रि को कभी अंधकार की जरूरत नहीं होती ।।
2 नदीयो को कभी गिला करने की जरूरत नहीं होती ।
सागरो को कभी सीमा की जरूरत नहीं होती ।।
3 पर्वत को कठोर होने की जरूरत नहीं होती ।
ज्ञानी को कभी मार्गदर्शन की जरूरत नहीं होती ।।
4 मनुष्य को इन्सानियत बचपन से ही मिलीं रहतीं हैं ।
जिसे हमे चाह कर भी बदलने की जरूरत नहीं होती ।।

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