Skip to content

जरुरी नही हर बात कहें,कुछ दर्द छुपे ही रहने दो…

kapil Jain

kapil Jain

कविता

November 7, 2016

जरुरी नही हर बात कहें
कुछ दर्द छुपे ही रहने दो
लबो को न दो तकलीफ मेरे
कुछ ख़ामोशी को कहने दो
जरुरी नही हर बात कहें
कुछ दर्द छुपे ही रहने दो ।

सोये राहगीर जमीनों पे
इनको कोई बिछौने दो
जागी है ये भी संग मेरे,
इन रातो को भी सोने दो
जरुरी नही हर बात कहें
कुछ दर्द छुपे ही रहने दो ।

गम के रेगिस्तान में थोड़ी,
खुशियों को भी बहने दो
लगातार चली,थकी होगी
जरा हवा को साँस लेने दो
जरुरी नही हर बात कहें
कुछ दर्द छुपे ही रहने दो ।

माहौल नया सा लगता है
दुनिया को इसमें ढलने दो
खोलो पिंजरे सभी परिंदों के
सबको आजाद रहने दो ।
जरुरी नही हर बात कहें
कुछ दर्द छुपे ही रहने दो ।

कपिल जैन

Share this:
Author
kapil Jain
नाम:कपिल जैन -भोपाल मध्य प्रदेश जन्म : 2 मई 1989 शिक्षा: B.B.A E-mail:-kapil46220@gmail.com

क्या आप अपनी पुस्तक प्रकाशित करवाना चाहते हैं?

आज ही अपनी पुस्तक प्रकाशित करवायें और आपकी पुस्तक उपलब्ध होगी पूरे विश्व में Amazon, Flipkart जैसी सभी बड़ी वेबसाइट्स पर

साथ ही आपकी पुस्तक ई-बुक फॉर्मेट में Amazon Kindle एवं Google Play Store पर भी उपलब्ध होगी

साहित्यपीडिया की वेबसाइट पर आपकी पुस्तक का प्रमोशन और साथ ही 70% रॉयल्टी भी

सीमित समय के लिए ब्रोंज एवं सिल्वर पब्लिशिंग प्लान्स पर 20% डिस्काउंट (यह ऑफर सिर्फ 31 जनवरी, 2018 तक)

अधिक जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें- Click Here

या हमें इस नंबर पर कॉल या WhatsApp करें- 9618066119

Recommended for you