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** जरा दिल साफ हो ले **

12.3.17 सन्ध्या 7.15
मुश्किलें बहुत है राहे मंजिल

मुश्किलों से दो -चार हो ले

कुछ कर्म कर पार हो ले

राहे मंजिलो में मुश्किलें बहुत

ना दुःख से रो होले- होले ।।
?मधुप बैरागी

ज़ख्म धो लें ,होले होले रो लें

तमन्नाऐं नासूर बन अब बोलें

प्यार हरा हो लें दर्द देंगे ज़ख्म

पहले जरा दिल साफ तो हो लें।।
?मधुप बैरागी

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भूरचन्द जयपाल
भूरचन्द जयपाल
मुक्ता प्रसाद नगर , बीकानेर ( राजस्थान )
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मैं भूरचन्द जयपाल 13.7.2017 स्वैच्छिक सेवानिवृत - प्रधानाचार्य राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, कानासर जिला -बीकानेर...
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