Aug 15, 2016 · कविता
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जय हो (कविता)

।।जय हो (कविता)।।

भारत माता की सेवा में
जिसने सब कुछ त्यागा ।।
ताकि देश हमारा सोये
रात रात भर जागा ।।
इक ही धन ही
सिर्फ अमन ही
उनका एक ईमान ।।
जय ही मेरे वीर जवान ।।1।।

वन बंज़र कानन कुंजो में
सहे धूप बरसात
विकशित करते हर जीवन में
सुख का नया प्रभात
जल हो थल हो
नभ् अंचल हो
रहते एक समान ।।
जय हो मेरे वीर जवान ।।2।।

अस्त्र और शस्त्रो से सज्जित
युद्ध भूमि में रण में
हुये नही न होंगे विचलित
लिये हुये उस प्रण में
अरि की आशा
हुई निराशा
बन जाते हो एक तूफ़ान ।।
जय हो मेरे वीर जवान ।।3।।

मातृभूमि तो सिर्फ तुम्हारी
सेवा का प्रतिफल है
त्याग तुम्हारा भक्ति तुम्हारी
हम सब का सम्बल है
रहकर निर्भर
जिस गौरव पर
हम सब को है अभिमान ।।
जय ही मेरे वीर जवान ।।4।।

देशभक्ति ही एक धर्म है
मानवता की रक्षा
एक साधना और उसी की
करते रहे सुरक्षा
अनुशासन से
अपने तन से
रखते देश की शान ।।
जय ही मेरे वीर जवान ।।5।।

तुम हो अमर कहानी लिखते
तुम रचते इतिहास
और तुम्ही ने पूर्ण कर लिया
जीवन पर अभ्यास
अरि के हन्तक
युगों युगों तक
बने रहोगे तुम्ही महान ।।
जय हो मेरे वीर जवान ।।6।।

भारत की इस भारतीयता
का तुम हो आधार
ऋणी रहेगा देश तुम्हारा
जानेगा संसार
पाकर अवसर
याद तुम्हे कर
गायेगा जय गान ।।
जय हो मेरे वीर जवान ।।7।।

धन्य हमारी जन्मभूमि है
धन्य है भारतमाता
धन्य हो गया निज जीवन भी
पता वही है पता
जिसने निर्भय
सीख़ लिया है
बनकर रहना अब इंसान ।।
जय हो मेरे वीर जवान ।।8।।

जाति धर्म का भेद मिटाकर
जल थल और पवन में बेसक
जिसने लहराया है परचम
आसमान में दूर गगन तक
मैं क्या पूरा
देश उन्ही को
करता रहता है प्रणाम ।।
जय हो मेरे वीर जवान ।।9।।

जय तेरे जीवन की गाथा
जय तेरा प्रयास
जय जय जय तेरी प्रतिज्ञा
जय हो जय विश्वास
प्रीति की जय हो
जीत की जय हो
जय पर जय अभिमान ।।
जय हो मेरे वीर जवान ।।10।।

******राम केश मिश्र

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रकमिश सुल्तानपुरी मैं भदैयां ,सुल्तानपुर ,उत्तर प्रदेश से हूँ । मैं ग़ज़ल लेखन के साथ... View full profile
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