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जय हिंद

जिगर में आज भी अपने तिरंगा मुस्कुराता है
भगत सुखराज वो बल्लभ वो गंगा मुस्कुराता है
—–??—-
वो टूटी झोपड़ी में सो सूखी रोटी ही खाकर
जो ‘जन गण मन’ कोसुनकर वोनंगा मुस्कुराता है
——-??—-
बड़े ही शान से कहता हूँ भारत आन है अपनी
फलक पे जिस तरह तारों में चंदा मुस्कुराता है
——??—–

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प्रीतम श्रावस्तवी
प्रीतम श्रावस्तवी
भिनगा
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मैं रामस्वरूप उपनाम प्रीतम श्रावस्तवी S/o श्री हरीराम निवासी मो०- तिलकनगर पो०- भिनगा जनपद-श्रावस्ती। गीत...
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