जय श्रीकृष्ण

मीरा सी दीवानगी, राधा जैसी प्रीत
श्याम तुम्हारी भक्ति की, चली आ रही रीत

गोबर्धन को थाम कर, तोड़ा इंद्र गुरूर
नाग कालिया मार कर, किये कष्ट सब दूर
कानों में गूंजा मधुर, वंशी का संगीत
श्याम तुम्हारी भक्ति की, चली आ रही रीत

चक्र उठाकर कर दिया, दुष्टों का संहार
गीता के उपदेश दे, तार दिया संसार
हरे राम कृष्णा हरे, गूँज रहे हैं गीत
श्याम तुम्हारी भक्ति की, चली आ रही रीत

भावों का लेकर दिया,बाती शब्द कपास
करूँ तुम्हारी’अर्चना’,पूरी करना आस
रहूँ दूर अभिमान से,रहे स्वभाव विनीत
श्याम तुम्हारी भक्ति की, चली आ रही रीत

12-08-2020
डॉ अर्चना गुप्ता
मुरादाबाद

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