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जय माँ शारदे …….. ————————- कलम तू ऐसे चल कि शब्दों की मर्यादा बनी रहे।

पूनम झा

पूनम झा

मुक्तक

November 27, 2016

जय माँ शारदे ……..
————————-
कलम तू ऐसे चल कि शब्दों की मर्यादा बनी रहे।
रचे जब कोई रचना तो रचनाओं की मर्यादा बनी रहे।
ओ सरस्वती के शिष्य,रची तेरी रचना पढ़े जब कोई
माता के भक्त,तो माँ शारदे की मर्यादा बनी रहे।
@पूनम झा।कोटा,राजस्थान।

Author
पूनम झा
मैं पूनम झा कोटा,राजस्थान (जन्मस्थान: मधुबनी,बिहार) से । सामने दिखती हुई सच्चाई के प्रति मेरे मन में जो भाव आते हैं उसे शब्दों में पिरोती हूँ और यही शब्दों की माला रचना के कई रूपों में उभर कर आती है।... Read more
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