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जय भोलेनाथ

Sonu Jain

Sonu Jain

कविता

February 13, 2018

ॐ नमः शिवाय

गले मे जिनके नागराज विराजे है,,,
भक्त जिनके भांग पीकर मस्ती में नाचे है,,
●ऐसे सर्पधारी के चरणों में मेरा प्रणाम है।।

जटा में जिनके गांगा जगत तारणी का वास है,,,
जग में जिसने अमृत नीर से किया सबका उद्धार है,,
●ऐसे गंगाधारी के चरणों में मेरा प्रणाम है।

पिशाचो से गिरे रहते हरदम जिनका रूप
बड़ा निराला है,,,
जिनके हाथों में त्रिशूल और डम डम बाजे डमरू है,,,
●ऐसे डमरूधारी के चरणों मे मेरा प्रणाम है।

बदन पर जिनके मसानों की भस्म लगी है,,,
अपार सुंदरी शीलवती गौरी जिनकी अर्धांगनी है,,,
●ऐसे गौरीशंकर के चरणों मे मेरा प्रणाम है।।

प्रलयकाल की बेला में जो शिव तांडव करते है,,,
अपनी तीसरी आँख से ब्राम्हाड को समाप्त जो
कर देते है,,,
●ऐसे प्रलयंकारी के चरणों मे मेरा प्रणाम है।।

देवों में देव महादेव जिनका पावन नाम है,,
गिरजापति, त्रिलोकदर्शी जिनके जगत में
अनेकों नाम है,,,
●ऐसे भोलेभंडारी के चरणों मे मेरा प्रणाम है।

जिनका नंदी जैसा बलशाली वाहन है,,,,
ब्रम्हा से जिनका रुद्र रूप में अवतरण हुआ है,,,
●ऐसे रुद्र्धारि के चरणों मे मेरा प्रणाम है।

जो कैलाशगिरी पर तप और आराधना में लीन है,,,
जिसने शरीर पर पहनी मृग की छाल है,,,
●ऐसे कैलाशवासी के चरणों मे मेरा प्रणाम है।

गायत्री सोनु जैन

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Author
Sonu Jain
From: Mandsour
Govt, mp में सहायक अध्यापिका के पद पर है,, कविता,लेखन,पाठ, और रचनात्मक कार्यो में रुचि,,, स्थानीय स्तर पर काव्य व लेखन, साथ ही गायन में रुचि,,,
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