Aug 23, 2017 · कविता
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जय भारती

क्यों न करूँ मैं
गर्व देश पर,
धन्य हुआ मैं
यहाँ जन्म लेकर,
गीत गाऊँ मैं
अपने देश के,
गर्व से कहूं
जय भारती!
जय भारती!

कितनी पावन धरती है
यहां पत्थर भी
पूजे जाते है,
हर नर में राम
जहाँ हर नारी में
सीता बसती है!

लोग यहाँ के
एकदम निराले,
दुश्मन को भी
सीने से लगाते,
भेदभाव नहीं यहाँ
सभी एक समान है,
हर जाति धर्म के
यहाँ लोग मिलेंगे
सब का नाता एक है!

फिर क्यों न कहूँ
मैं सीना ताने
अपना देश महान है,
माँ है मेरी
भारत जननी,
गर्व से कहूं
जय भारती!
जय भारती!

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Bikash Baruah
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मैं एक अहिंदी भाषी हिंदी नवलेखक के रूप मे साहित्य साधना की कोशिश कर रहा... View full profile
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