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जयबालाजी:: भक्ति दृगों से नहीं ह्रदय से :: जितेंद्रकमलआनंद (४१)

Jitendra Anand

Jitendra Anand

मुक्तक

October 18, 2016

ताटंक छंद:
भक्ति दृगों से नहीं , ह्रदयसे देखी- समझी जाती है ।
भक्ति विकलके पोछे ऑसू, भक्ति स्वर्ग कहलाती है
भक्ति गीत है, भक्ति मीत है , प्रेम पंथ है उजियाला,
नीराजन है, आराधन है , भक्ति कमल, दीपक, बाला!!
—– जितेंद्रकमलआनंद

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Author
Jitendra Anand
हम जितेंद्र कमल आनंद को यह साहित्य पीडिया पसंद हैं , हमने इसलिए स्वरचित ११४ रचनाएँ पोस्ट कर दी हैं , यह अधिक से अधिक लोगों को पढने को मिले , आपका सहयोग चाहिए, धन्यवाद ----- जितेन्द्रकमल आनंद
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