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जमाने की राहें

सोबन सिंह रावत

सोबन सिंह रावत

गज़ल/गीतिका

January 12, 2018

चलते रहो राहों पर जमाने की,राहें कब बदल जाएं ,कहना मुश्किल।।
कब घोंप दे कोई अपना ही पीठ पर खंजर,आहें कब निकल आएं ,कहना मुश्किल।।

बहुत नाज है जिस याराने पर,यार कब फिसल जायें कहना मुश्किल।।
दुनिया संग प्यार की डोर बांधे रखो ,डोर कब जल जाये कहना मुश्किल।।

पालते रहो हसरतों पे हसरतें,कितनी कब दम तोड़ जायें कहना मुश्किल।
लगाते रहो गले हर रिश्ते को, कितने कब मुँह मोड़ जायें,कहना मुश्किल।।

प्यार के पंछी बन फड़फड़ाते रहो पंखो को,कितने कब झड़ जायें, कहना मुश्किल।।
गोता लगाते रहो प्यार के सागर में ,मीत कब लड़ जायें कहना मुश्किल।।

ख्वाब देखने में बुराई भी क्या है,पर नींद कब खुल जाये कहना मुश्किल।।
बहुत बेरहम दौर भी आते हैं जिंदगी में,आँखे कब धुल जायें, कहना मुश्किल।।

कितना निभा सकोगे फर्ज जिंदगी का,है अनजाना ,कहना मुश्किल।।
कितना चढ़ गया कर्ज जिंदगी का, नहीं कोई पैमाना,कहना मुश्किल।।

चलते रहो राहों पर जमाने की,राहें कब बदल जाएं ,कहना मुश्किल।।
कब घोंप दे कोई अपना ही पीठ पर खंजर,आहें कब निकल आएं ,कहना मुश्किल।।

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Author
सोबन सिंह रावत
जन्म स्थान-ग्राम पोस्ट खवाड़ा बासर टिहरी गढ़वाल उत्तराखंड ।ग्राम पंचायत अधिकारी(पंचायत सचिव ) के पद पर कार्यरत जौनपुर टिहरी गढ़वाल उत्तराखंड।। जन्म तिथि एक नवम्बर उन्नीस सौ त्रेसठ।
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