जमाने का शुक्रिया

नाराजगी मेरी यूं समझने का शुक्रिया||
कुछ पूछने से पहले बताने का शुक्रिया||

लाखों तुम्हारे झूंठ बहाने मिले बहुत|
झूंठा सही ये इश्क जताने का शुक्रिया||

थम जाएगी ये सांस भी गर साथ ना मिला|
सब जानकर यूं दूर भी जाने का शुक्रिया||

सबकुछ दिया मुझे ना मगर प्यार दे सकी|
नाजुक से मेरे दिल को सताने का शुक्रिया||

कहता रहेगा रोज जमाने को ‘धुरंधर’|
जिसमें मिले वफा़ ना जमाने का शुक्रिया||

~जनार्दन पाठक ‘धुरंधर’
~ 8299215712

कुछ खाश दी बहर मुझे कुछ खाश काफिया|
ऐसी मुझे रदीफ दिलाने का शुक्रिया||

~जनार्दन पाठक ‘धुरंधर’

😊

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मैं बात अपने दिल की कुछ यूँ खोलता हूँ| खामोश रहता हूँ मैं फिर भी...
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