Jun 15, 2016 · कविता
Reading time: 1 minute

जमाना हुआ खुद से मिले

वक्त मिले तो बैठूं अपने साथ
की जमाना हुआ खुद से मिले।
करूँ कुछ शिकवे करुँ कुछ गिले
की जमाना हुआ खुद से मिले।
थे जगे ऊपर से अंदर से पर सोए
बेवजह की दुनियादारी में बिना वजह ही खोए।
दुनियादारी में खोए तो लगा पता
दुनिया है बस मतलब कि हमसे ना किसी को वास्ता।
हमसे ना किसी को वास्ता तो कैसे ये दिखावटी सिलसिले
क्यूँ ना बैठूं साथ अपने की जमाना हुआ खुद से मिले।

178 Views
Dr ShivAditya Sharma
Dr ShivAditya Sharma
19 Posts · 4.1k Views
Follow 2 Followers
Consultant Endodontist. Doctor by profession, Writer by choice. बाकी तो खुद भी अपने बारे में... View full profile
You may also like: