Feb 15, 2017 · कविता
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जब हम छोटे-छोटे बच्चे थे।

सभी दोस्तों को बाल दिवस की बहुत-बहुत शुभकामनाएँ
????
चलो फिर से,
उन लम्हों को चुनते हैं।
जब हम छोटे-छोटे बच्चे थे।
हम साथ साथ में लड़ते झगड़ते थे।
हम साथ में हँसते खेलते थे।।
इन छोटे-छोटे आँखों में,
मासुम से सपने पलते थे।
चलो……………..।
मम्मी की प्यार,
पापा का डाँट,
हम साथ-साथ में पाते थें।
जब एक दूजे की गलती को,
चुपचाप छुपाया करते थे।
चलो…………….।
कभी नराजगी तो,
कभी एक दूजे पर
प्यार लुटाया करते थें।
जब एक ही थाली में,
मिलजुलकर खाया करते थें।
चलो…………..।
हम बड़े हो गये,
क्यों एक दूजे से जुदा हो गये।
जिन्दगी की परेशानियों में,
बचपन ना जाने कहाँ खो गये।
बचपन की सारी बातें,
बस यादों में ही पलते हैं।
चलो फिर से,
उन लम्हों को चुनते हैं।
जब हम छोटे-छोटे बच्चे थे।
????—लक्ष्मी सिंह

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लक्ष्मी सिंह
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MA B Ed (sanskrit) My published book is 'ehsason ka samundar' from 24by7 and is... View full profile
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