जब से दुकान खोली है तीरो कमान की

अल्लाह कर रहा है हिफ़ाजत मकान की
बिजली यहाँ गिरे तो गिरे आसमान की
……..
बाज़ी लगाने जान की आया न तब कोई
जबसे दुकान खोली है तीरो कमान की
……..
मुझसे वफ़ा निभाते हैं अपने भी ग़ैर भी
दुनिया सजा के बैठा हूँ वहमो गुमान की
………
सच तो यहीं है माने न माने कोई मगर
सारे जहाँ में धूम है उर्दू ज़बान की
………
सारा लहू निचोड दो दामन पे देश के
मिटटी महकनी चाहिये हिन्दुस्तान की
………
सालिब वही है मालिको मुख़तारेे कुल जहाँ
तक़दीर लिख रहा है जो सारे जहान की
……..
सालिब चन्दियानवी

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