जब वो मेरी थी

एक दिन था जब वो मेरी थी
पर लगता अब वो बात नहीं
वो साथ हमारे कल तक थी
अब हाथ में उसका हाथ नहीं
वो कहती तुम सांसों में
तुम यादों में तुम बातों में
वो कहती नींद नहीं आती
तुम हर रात ख़यालों में
पर मुमकिन अब मुलाक़ात नहीं
वो साथ हमारे कल तक थी
अब हाथ में उसका हाथ नहीं
वो कहती तुम रुक जाओ
जब याद करूँ चले आओ
वो कहती हम तन्हा हैं
तुम आओ गले लगा जाओ
कुछ सुकून हमें मिल जाएगा
कुछ धड़कन भी बढ़ जायेगी
जब नज़रें तुमको देखेंगी
कुछ वजह हमें मिल जायेगी
सब कथा कहानी लगते हैं
बिलकुल सच्चे जज़्बात नहीं
एक दिन था जब वो मेरी थी
पर लगता अब वो बात नहीं

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