कविता · Reading time: 1 minute

जब याद आते हैं “बीते लम्हें”

जब याद आते हैं बीते लम्हें,

मन पुलकित हो जाता है,
दिल का चमन खिल जाता है।
खयालो का चंचल पंछी,
अरमानों के आसमान मैं उड़ जाता है।।

चेहरे पर मधुर मुस्कान आ जाती है,
गालो पर फिर वही, रंग गुलाबी हो जाता है।
धड़कन प्यारी सरगम गुनगुनाती है,
फिर आंखों के सामने ,वही नजारा छा जाता है।।

नीले अंबर मैं बादल की तरह तुम,
मैं चकोर पंछी की तरह देखता जाता हूं।
कब बरसोंगे, अतृप्त भूमि पर।
फूट पड़ा बादल कहीं,मै एक बूंद को तरस जाता हूं।।

सितारों भरी रात का नजारा ही कुछ और है।
हमें ही सितम खाया बैठे हैं चारों ओर शोर हैं।।

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