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जब भी कभी चुनाव

चली झूठ के नीर पर, नेताजी की नाव!
आये मेरे देश मे, जब भी कभी चुनाव!!

आते है इस देश मे, जब भी कभी चुनाव!
जाति -धर्म के नाम का,पकने लगे पुलाव! !
रमेश शर्मा.

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RAMESH SHARMA
RAMESH SHARMA
मुंबई
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दोहे की दो पंक्तियाँ, करती प्रखर प्रहार ! फीकी जिसके सामने, तलवारों की धार! !...
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