जब बेटियां हमारी हमें छोड़ जाती हैं (विदाई).

नम हो जाती हैं ऑखें भर आती हैं
जब बेटियां हमारी हमे छोड़ जाती हैं
बचपन में बेटी को जी भर दुलराते हैं
बाहों में झुलाते हैं कांधे पे उठाते हैं
वो बाहों का मां बाबुल का अंगना
जब बेटियां हमारी सब छोड़ जाती हैं
वो सखियों संग हंसना वो गुडियों संग सजना
वो भैया संग लड़ना वो नानी का बटना
जब बेटियां हमारी सब छोड़ जाती हैं
वो चुनी हुई राहें वो आँखों का सपना
नयनों के झरोखे में उंगली थामे बढ़ना
एक दिन जब हकीकत मे जब बेटियां हमारी वहाँ दौड़ जाती हैं
आशाएँ करते हैं नव पथ में बढ़ने की
जीवन के रास्तों पर अविराम चलने की
वो ख्वाबों की दुनिया उस पर उसका बढ़ना जब बेटियां हमारी वहाँ दौड़ जाती है
वो रानी बन रहना हँस कर सब कुछ सहना
नन्ही सी गुडिया का वो मम्मी बन जाना
वो प्यारा सा बन्धन जब बेटियां हमारी सब जोड़ आती हैं
नम हो जाती हैं खुश हो भर आती हैं जब बेटियां हमारी वहां दौड़ जाती हैं

रेखा रानी विधा गीत

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