जन्माष्टमी दोहे : उत्कर्ष

कृष्णपक्ष कृष्णाष्टमी,कृष्ण रूप अवतार ।
हुए अवतरित सृष्टि पे,जग के पालनहार ।।

जन्म हुआ था जेल में,भादो की थी रात ।
द्वारपाल सब सो गए,देख अनोखी बात ।।

✍?नवीन श्रोत्रिय “उत्कर्ष”©
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