जन्माष्टमी दोहे : उत्कर्ष

कृष्णपक्ष कृष्णाष्टमी,कृष्ण रूप अवतार ।
हुए अवतरित सृष्टि पे,जग के पालनहार ।।

जन्म हुआ था जेल में,भादो की थी रात ।
द्वारपाल सब सो गए,देख अनोखी बात ।।

✍?नवीन श्रोत्रिय “उत्कर्ष”©
★ ★ ★ ★ ★

क्या आप अपनी पुस्तक प्रकाशित करवाना चाहते हैं?

साहित्यपीडिया पब्लिशिंग द्वारा अपनी पुस्तक प्रकाशित करवायें सिर्फ ₹ 11,800/- रुपये में, जिसमें शामिल है-

  • 50 लेखक प्रतियाँ
  • बेहतरीन कवर डिज़ाइन
  • उच्च गुणवत्ता की प्रिंटिंग
  • Amazon, Flipkart पर पुस्तक की पूरे भारत में असीमित उपलब्धता
  • कम मूल्य पर लेखक प्रतियाँ मंगवाने की lifetime सुविधा
  • रॉयल्टी का मासिक भुगतान

अधिक जानकारी के लिए इस लिंक पर क्लिक करें- https://publish.sahityapedia.com/pricing

या हमें इस नंबर पर काल या Whatsapp करें- 9618066119

Like 1 Comment 4
Views 1.2k

You must be logged in to post comments.

Login Create Account

Loading comments
Copy link to share