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जन्मभूमि

हमारे पूर्वजाे की यह कर्मभूमि,
उमरेड़ हैं हमारी जन्मभूमि,
यहाँ की मिट्टी में घुला स्नेह,
नही इस पर काेई संदेह,
यह गांव हमारा है एक परिवार,
मिलकर प्रेम से मनाते त्याैहार,
चाराे ओर फैली यहां हरियाली,
गीत खुशी के गाते दीवाली हाे या हाेली,
सावन मे लगते पेड़ाे पर झूले,
हीड़ गायन गाते हाेकर अलबेले,
भुजरिया पर्व दिखलाता अद्भुत भाईचारा,
पिकनिक पर जाते बच्चे खुशी खुशी पनियारा,
मंदिर मे पढ़कर, धाेबीघटा में नहाकर हुए बड़े,
सीताफल, तेंदू , अचार खाये जाकर जंगल चढ़े,
बिजली आती गलियों मे मचाते शाेर,
कूचा कूची, अष्टाचंगा,खेले सिपाही चाेर,
महुआ बीने, गाेंद ताेड़े, आेर ताेड़े तेंदू पत्ता,
वीसीआर पर पिक्चर देखते,दिखलाते अपनी सत्ता,
हमकाे लगता गांव हमारा प्यारा,
सबसे है अलग, सबसे है न्यारा,
।।।।जेपीएल।।।

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जगदीश लववंशी
जगदीश लववंशी
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J P LOVEWANSHI, MA(HISTORY) ,MA (HINDI) & MSC (MATHS) , MA (POLITICAL SCIENCE) "कविता लिखना...