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जन्नत

Bhupendra Rawat

Bhupendra Rawat

कविता

July 31, 2017

माता पिता के रूप में ही मुझे मेरा खुदा नज़र आया है

माता पिता के चरणों में ही मैंने जन्नत को पाया है |

माता पिता के चरणों में ही तो तीर्थ धाम है

माता पिता के चरणों के जैसा कहाँ पावन धाम है

माता पिता ही तो मेरे भगवान है

माता पिता के जैसा याँ कौन दूजा इंसान है

माता पिता है तभी तो आज मेरी पहचान है

माता पिता की वजह से ही तो इस जहाँ में मेरा नामोनिशान है
भूपेंद्र रावत
३१/०७/२०१७

Author
Bhupendra Rawat
M.a, B.ed शौकीन- लिखना, पढ़ना हर्फ़ों से खेलने की आदत हो गयी है पन्नो को जज़बातों की स्याही से रँगने की अब बगावत हो गईं है ।
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