"जनाबेआली "(व्यंग्य कविता)

“जनाबेआली”(व्यंग्य कविता)
अजीब सी कशमकश हैं
जनाबेआली
भाभी को सब माँ कहते हैं
तो साली क्यूँ आधी घरवाली।

अजीब सी कशमकश हैं
जनाबेआली
भाभी को ननंद पटती नहीं
जीजा को पटती है साली।

अजीब सी कशमकश हैं
जनाबेआली
पत्नी को तो पति भाता है
पति को भाती बाहर वाली।

अजीब सी कशमकश हैं
जनाबेआली
एक की थाली में भरपूर व्यंजन
एक की थाली पड़ी है खाली।

अजीब सी कशमकश हैं
जनाबेआली
90फीसद आराम फरमाते
10 फीसद करते रखवाली।

रामप्रसाद लिल्हारे “मीना “

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