घनाक्षरी · Reading time: 1 minute

जनहरण घनाक्षरी

जनहरण घनाक्षरी ( 30 लघु वर्ण चरणांत 1 वर्ण दीर्घ। 8,8,8,7 पर यति)
घन नभ गरजत ,रिमझिम बरसत,
अनुपम छवियुत ,सब हरित धरा।
तरुवर विकसत, खग-मृग हरषत,
हर नद सरवर, पय दिखत भरा।
ऋतु अति मनहर, सब विधि सुखकर,
तृषित अधर जन ,दुख सकल हरा।
चपल तड़ित द्युति,चमकत नभ पर,
पिय बिनु सखि हिय,नित रहत डरा।।

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