Sep 24, 2020 · दोहे
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जग के दोहे -५

【४१८-४२४】

लेकर जब प्रभु नाम से, दिन की हो शुरुआत ।
दूर होते विघ्न सभी, बन जाती हर बात ।।

मन के भीतर ही बसे, मंदिर के भगवान ।
मन अपना स्वच्छ रखिए,होगी फिर मुस्कान ।।

इधर – उधर देखों जहाँ, दिखता उनका रूप ।
सबके दिलों में बसता, प्रभु का ही स्वरूप ।।

तेरा ही है आसरा, ओ जग के करतार ।
सबके दुःख को हर कर, जल्द करो उद्धार ।।

दुनिया तुमको पूजती, जग के पालनहार ।
जग में घोर संकट है,आओ ले अवतार ।।

मोह माया से जकड़ा, सारा यह संसार ।
रिश्ते धूमिल हो रहे, टूट रहा परिवार ।।

माया है बड़ी ठगनी, लेती सदा दबोच ।
पहले देती है ख़ुशी, फिर हर लेती सोच ।।
——जेपीएल

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जगदीश लववंशी
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J P LOVEWANSHI, MA(HISTORY) ,MA (HINDI) & MSC (MATHS) , MA (POLITICAL SCIENCE) "कविता लिखना... View full profile
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