जगे युवा-उर तब ही बदले दुश्चिंतनमयरूप ह्रास का

युवक जाग जाए तो, विकसित राष्ट्र, भाल छूता विकास का |
अगर सो गया , तब हिंसा औ अवनतिमय दुश्चक्र नाश का |
जस मानव, वैसा स्वदेश है ,सत्य बात सुनिए सुविज्ञ जन |
जगे युवा-उर तब ही बदले दुश्चिंतनमयरूप ह्रास का |
……………………………………………………….

बृजेश कुमार नायक
“जागा हिंदुस्तान चाहिए” एवं “क्रोंच सुऋषि आलोक” कृतियों के प्रणेता

जागा हिंदुस्तान चाहिए कृति का मुक्तक

पेज- 19से

05-05-2017

125 Views
1) प्रकाशित कृतियाँ 1-जागा हिंदुस्तान चाहिए "काव्य संग्रह" 2-क्रौंच सु ऋषि आलोक "खण्ड काव्य"/शोधपरक ग्रंथ...
You may also like: