Skip to content

जख्म दिल का भला कैसे छिपाया होगा

बबीता अग्रवाल #कँवल

बबीता अग्रवाल #कँवल

गज़ल/गीतिका

December 11, 2016

जख्म दिल का भला कैसे छिपाया होगा
उभरकर सामने ही दर्द जब आया होगा

दास्तां बेवफ़ाई की सुन उस सितमगर की
अपना टूटा हुआ दिल याद तो आया होगा

लट उलझी सी चेहरे पर जब बिखरी होगी
किस कदर दिवानों का दिल जलाया होगा

नज़र आपकी तरफ भी तो उठी ही होगी
जब किसी क़ातिल का नाम आया होगा

जी न सकेंगे सनम तेरे बिन पल भर भी
न पूछो के मैने ये रैन कैसे बिताया होगा

याद नहीं है मुफ़लिसी किसी को भी मेरी
बड़ी मुश्किल से ये मंजिल को पाया होगा

मिलती रही है सजा कँवल को किस जुर्म की
दिल किसी का तो उसने नहीं दुखाया होगा

Author
बबीता अग्रवाल #कँवल
जन्मस्थान - सिक्किम फिलहाल - सिलीगुड़ी ( पश्चिम बंगाल ) दैनिक पत्रिका, और सांझा काव्य पत्रिका में रचनायें छपती रहती हैं। (तालीम तो हासिल नहीं है पर जो भी लिखती हूँ, दिल से लिखती हूँ)
Recommended Posts
II सजा दिल लगाने की II
साथ मेरे मिली उसको, सजा दिल लगाने की l मुझको पता उसने मुझसे, यह छुपाया होगा ll बात कर लेता हूं अपनी, मैं मेरी ग़ज़ल... Read more
प्यार और परिवार
एक लडका और लडकी दोनो आपस मे बहुत प्यार करते थे पर कुछ प्रोब्लम कि वजह से लडकी की शादी कहीँ और हो जाती है.... Read more
चाँद सह्न पर आया होगा
होगी आग के दर्या होगा देखो आगे क्या क्या होगा ख़ून रगों में लगा उछलने चाँद सह्न पर आया होगा रस्म हुई हाइल गो फिर... Read more
चुनाव आया
चुनावी परिवेश पर आधारित आप सभी को सादर समर्पित एक नवरचना ------- चुनाव आया, चुनाव आया, चुनाव आया । वोटों के दरिया में , नोंटों... Read more