23.7k Members 49.8k Posts

" जंगल सी ज़िन्दगी , मेमने से हम " !!

सरसराती हवाएं ,
कंपकंपाती हैं !
उठता है शोर कहीं ,
नींद जाती है !
संदली खुशबू कहाँ –
समेटते हैं हम !!

अधिकार हाथों में ,
सम्वेदनाएँ खत्म !
सबके हिस्से में ना ,
अब रहे जश्न !
बेचारगी , विवशता –
लपेटते हैं हम !!

कमसिन उमरिया ,
नजरें फिरी फिरी !
नारी नहीं सबला ,
अब भी डरी डरी !
सपनों की खेती –
बिखेरते हैं हम !!

देते वे शहादत ,
नेता हैं सिरफिरे !
केसर की बग़ावत
मधुवन कहाँ संवरे !
बारूदी सपनों को –
उछेरते हैं हम !

पंख रंग बिरंगे ,
हमको नहीं मिले !
हासिल नहीं ज्यादा
कोई नहीं गिले !
जो भी मिली दुआ –
लपेटते हैं हम !!

Like Comment 0
Views 123

You must be logged in to post comments.

LoginCreate Account

Loading comments
भगवती प्रसाद व्यास
भगवती प्रसाद व्यास " नीरद "
284 Posts · 33.3k Views
एम काम एल एल बी! आकाशवाणी इंदौर से कविताओं एवं कहानियों का प्रसारण ! सरिता...