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” जंगल सी ज़िन्दगी , मेमने से हम ” !!

भगवती प्रसाद व्यास

भगवती प्रसाद व्यास " नीरद "

गीत

April 27, 2017

सरसराती हवाएं ,
कंपकंपाती हैं !
उठता है शोर कहीं ,
नींद जाती है !
संदली खुशबू कहाँ –
समेटते हैं हम !!

अधिकार हाथों में ,
सम्वेदनाएँ खत्म !
सबके हिस्से में ना ,
अब रहे जश्न !
बेचारगी , विवशता –
लपेटते हैं हम !!

कमसिन उमरिया ,
नजरें फिरी फिरी !
नारी नहीं सबला ,
अब भी डरी डरी !
सपनों की खेती –
बिखेरते हैं हम !!

देते वे शहादत ,
नेता हैं सिरफिरे !
केसर की बग़ावत
मधुवन कहाँ संवरे !
बारूदी सपनों को –
उछेरते हैं हम !

पंख रंग बिरंगे ,
हमको नहीं मिले !
हासिल नहीं ज्यादा
कोई नहीं गिले !
जो भी मिली दुआ –
लपेटते हैं हम !!

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Author
भगवती प्रसाद व्यास
एम काम एल एल बी! आकाशवाणी इंदौर से कविताओं एवं कहानियों का प्रसारण ! सरिता , मुक्ता , कादम्बिनी पत्रिकाओं में रचनाओं का प्रकाशन ! भारत के प्रतिभाशाली रचनाकार , प्रेम काव्य सागर , काव्य अमृत साझा काव्य संग्रहों में... Read more

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