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छोड़ के कंचन महल अटारी

लक्ष्मी सिंह

लक्ष्मी सिंह

कविता

May 12, 2017

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छोड़ के कंचन महल अटारी,
जोगन रूप सजाऊंगी……
वृन्दावन की कुन्ज गली में,
अपनी कुटी बनाऊंगी…..
?
लट चिपकाऊ,भस्म रमाऊं,
लोकलाज बिसराऊंगी……
मन में तेरी मोहनी सुरत,
ले करताल बजाऊंगी……..
?
सास-ससुर की कही ना मानूं,
घुंघट मुख ना छिपाऊंगी……
लोग कहे मीरा भई बावरी,
लोक लाज बिसराऊंगी……..

???? —लक्ष्मी सिंह?☺

Author
लक्ष्मी सिंह
MA B Ed (sanskrit) My published book is 'ehsason ka samundar' from 24by7 and is a available on major sites like Flipkart, Amazon,24by7 publishing site. Please visit my blog lakshmisingh.blogspot.com( Darpan) This is my collection of poems and stories. Thank... Read more
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